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  • श्रद्धावान का जीवन यह भगवान की देन है (Shraddhavan’s life is the gift of God) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

    श्रद्धावान का जीवन यह भगवान की देन है (Shraddhavan’s life is the gift of God) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

    श्रद्धावान को स्वयं के जीवन की कभी भी घृणा नहीं करनी चाहिए । ’मेरा जीवन यह मेरे भगवान की देन है’, यह बात हर एक श्रद्धावान को याद रखनी चाहिए । भगवान की देन कभी भी गलत, घातक, अहितकारी, दुखदायी नहीं हो सकती । भगवान पर भरोसा करनेवाले श्रद्धावान को जीवन को सकारात्मक नजरिये से ... ...

  • तुम स्वयं ही स्वयं के मार्गदर्शक हो । (You are your own guide) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

    तुम स्वयं ही स्वयं के मार्गदर्शक हो । (You are your own guide) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

    हर एक व्यक्ति स्वयं ही स्वयं का मार्गदर्शक है । मनुष्य को चाहिए कि वह अपने अस्तित्व का एहसास रखकर स्वयं के हित का विचार करके, स्वयं का आत्मपरीक्षण करके अपना विकास करे । उपलब्ध जीवनकाल का उचित उपयोग करके मानव अपना आत्महित किस तरह कर सकता है, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री ... ...

  • अस्तित्व का एहसास (Awareness of Being) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

    अस्तित्व का एहसास (Awareness of Being) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

    मानव को प्राथमिक स्तर पर यह जानना चाहिए कि वह है, उसका अस्तित्व है, इसलिए उसके लिए सब कुछ है । `मैं हूँ’ इस बात का मानव को एहसास रखना चाहिए । मानव को अन्तर्मुख होकर `मैं कैसा हूँ’ यह स्वयं से पूछना चाहिए । बहुत बार मानव अपने अस्तित्व का एहसास खोकर जीवन भर ... ...

  • Fire at Dr. Nikola Tesla’s Laboratory

    Fire at Dr. Nikola Tesla’s Laboratory

    The story of  Dr. Nikola Tesla is one of faith, hope and belief. It is a story of what one individual can achieve and how a single person utterly dedicated to his cause and with unwavering faith in God can move mountains and change the world with his efforts. When we last saw Dr. Tesla ... ...

  • World Columbian Expo – 2

    World Columbian Expo – 2

    1st of May 1893 marked the commencement of the World Columbian Exposition in a grand style and in full swing. There were almost hundred thousand (one lakh) people witnessing this great fair on the very first day. The spectators enjoyed the Exposition throughout the day visiting various places, buildings and special exhibits, and as the ... ...